Friday, February 14, 2014

" चलो न साथी साथ मेरे "



 
चलो न साथी साथ मेरे
तेरे संग ही सफ़र खूबसूरत है
तुझे भी इतनी तो होगी नहीं
मुझे जितनी तेरी जरुरत है
ये दूरी जुदाई को कहदो अलविदा
मिटा दो जो भी शिकायत है 

चलो न साथी साथ मेरे....
कुछ पल कि ही साँसों को मोहलत है
 
तेरी कहानी तेरे गीत ही
मेरे लव्जों कि ये ही सूरत है
दिल के शहर में हुकूमत है जिसकी
वो तेरे वज़ूद कि मूरत है

चलो न साथी साथ मेरे.....
 
घटाओ को कहदो बरस जाए न
बूंदे ही तो इनकी सीरत हैं
हमें अपनी चाहत में भिगो लो न तुम 
आज हमको बहुत ही फुरसत है
 
चलो न साथी साथ मेरे.....
जिंदगी की तुही तू जियारत है !!
 
 
Written By : परी ऍम श्लोक

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